B.A History VVI Question No 6 And Answer In Hindi 2021

दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में  B.a में आने वाला History का  Question no 6 का  आंसर Hindi देने वाले हैं। जिसको आपने पढ़ लिया तो आप अच्छे मार्क्स से पास हो जायेंगे।

B.A Part-1

Question And Answer

प्रश्न-6 ईल्तूतमिश  के जीवन चरित्र और उपलब्धियों का वर्णन करें

Ans . ईल्तूतमिश ( 1211-1236 ) : ऐबक के देहान्त के बाद उसका पुत्र आरामशाह दिल्ली की गद्दी पर बैठा । परन्तु वह बड़ा ही अयोग्य शासक था । वह बिगड़ती हुई परिस्थितियों को सम्भाल न सका । इसलिये अमीरों ने इल्तुतमिश को दिल्ली का सुल्तान निर्वाचित कर लिया । 

उसकी प्रारम्भिक कठिनाईयाँ : गुलाम वंश के सुल्तानों में ईल्तुतमिश सबसे महान् था । वह एक दास था , जो अपनी योग्यता के बल पर दिल्ली का सुल्तान बना था । वह तुर्कीस्तान को अलवारी जाति का था । उसका जन्म एक उच्च परिवार में हुआ था । वह बचपन में बहुत सुन्दर था । बाल्यकाल से ही उसमें बुद्धिमता और साधुता के लक्षण दिखाई पड़ते थे । उसके भाईयों ने उसको बुखारा के एक व्यापारी के हाथ बेच दिया था । उससे एक व्यक्ति ने मोल लेकर उसको कुतुबुद्दीन ऐबक के हाथ बेच दिया था । कालक्रम में इल्तुतमिश प्रगति के पथ पर अग्रसर हुआ । वह अपनी योग्यता से बदायु का सुबेदार बन गया । उसकी योग्यता देखकर ऐबक ने अपनी कन्या से उसका विवाह कर दिया । खोखरी को उसने युद्ध में परास्त किया । जिससे उसकी प्रसिद्धि अत्यधिक बढ़ गई । उसे अमीर - उल - उमरा की उपाधि से विभूषित भी किया गया । 

अत : ईल्तुतमिश ने जो सिंहासन प्राप्त किया था वह फूलों की शैया नहीं बल्कि बड़ा ही कण्टकाकीर्ण था । अभी तो दिल्ली का सुल्तान शैशव - काल से गुजर रहा था । केवल 4 वर्ष तक ही ऐबक स्वतंत्र रूप से शासन कर सका था कि उसका अकस्मात देहान्त हो गया । अत : यह सल्तनत संगठित और सुव्यवस्थित न हो सका था । सौभाग्य से दिल्ली सल्तनत को इल्तूतमिश जैसा योग्य और चालाक शासक मिल गया । उसमें दिल्ली सल्तनत को सुदृढ़ और सुरक्षित रखने की क्षमता थी । इसी वजह से विद्वान ऐबक को दिल्ली सल्तनत का केवल संस्थापक मानते हैं , परन्तु उसका वास्तविक संस्थापक तो इल्तुतमिश ही था । उसके सामने चार बड़ी समस्याएँ थी । ईल्तुतमिश को शासन की बागडोर संभालने के बाद उसके सामने निम्नलिखित चार प्रमुख समस्याएँ थीं -

1. ईल्तुतमिश गुलाम था : उसकी पहली समस्या थी कि वह एक गुलाम था । इसलिए कुलीन और प्रभावशाली अमीर उसे सुल्तान मानने के लिए तैयार न थे । जबकि ईल्तुतमिश . का जन्म इलबरी कबीले के कुलीन तुर्क - वंश में हुआ था । पिता उसको सबों से अधिक मानता था । इस वजह से उसके भाईयों ने एक सौदागर के हाथ उसे बेच दिया । जिसको बाद में ऐबक ने खरीदा था । वह अपनी योग्यता से बहुत आगे बढ़ गया था । वह प्रतिष्ठित अमीरों की आँखों में खटक रहा था । वे दिल्ली में उसके विरुद्ध षडयंत्र रच रहे थे । उसने बड़े साहस और धैर्य के साथ अमीरों का सामना किया । सौभाग्य से उसको सेना का सहयोग तथा समर्थन प्राप्त था । उसने डटकर अमीरों के इस विद्रोह का दमन किया । इस तरह उसने अपने विरोधियों का दमन कर दिल्ली में अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर लिया । 

2. प्रतिद्वन्द्वियों की समस्या : उसकी दूसरी बड़ी समस्या प्रतिद्वन्द्रियों की थी । उसका पहला प्रतिद्वन्द्वी आरामशाह था । जो लाहौर से उसको तंग किया करता था । वह ऐबक का  वास्तविक उत्तराधिकारी था । लोग ईल्तुतमिश को अनाधिकारी और अपहर्ता समझते थे । इस समस्या को उसने शीघ्र ही हल कर दिया । उसका दूसरा प्रतिद्वन्द्वी यल्टुज था जो गजनी का शासक था । वह अपने को सम्पूर्ण भारत का शासक समझ रहा था । वह दिल्ली की सल्तनत को हड़पना चाहता था । उसका भी ईल्तूतमिश ने दमन कर दिया । तीसरा प्रतिद्वन्द्वी कुबाच था जो सिन्ध का शासक था और अपने को ऐबक का सम्बन्धी बतलाता था । दिल्ली पर उसकी भी दृष्टि लगी हुई थी । इसको भी उसने दबा कर निष्कंटक हो गया । 

3. राजपूतों की समस्या : उसकी तीसरी बड़ी समस्या राजपूतो की थी । राजपूत लोग अपनी खोई हुई स्वतंत्रता को भूलाये नहीं थे । वे लोग विद्रोह कर अपनी खोई हुई स्वतंत्रता को फिर से प्राप्त करना चाहते थे । जालौन , ग्वालियर , रणथंभौर और अन्य कई राज्यों के राजपूत राजाओं ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर दिया था । इल्तुतमिश ने अपनी पूरी ताकत लगाकर इन सब विद्रोहियों को नतमस्तक करवा दिया । 

4. मुगलों के आक्रमण की समस्या : मुगल लोग बड़े बूंखार और निर्दयी थे । इन दिनों वे अपने प्रसिद्ध नेता चंगेज खाँ के नेतृत्व में सारे मध्य एशिया को उजाड़ते हुए हागे बढ़ रहे थे । ये लोग शाह अलाउद्दीन पर टूट पड़े जो अपने पुत्र जलालुद्दीन के साथ भाग खड़ा हुआ । जलालुद्दीन ने गजनी पर धावा बोल दिया और यल्दूज को मार भगाया । यल्दूज पंजाब भागा और लाहौर में आकर शरण लिया । मुगलों ने जलालुद्दीन का पीछा न छोड़ा । गजनी से भी वह भाग खड़ा हुआ और भारत की ओर चल पड़ा । उसने सिन्धु नदी के किनारे अपना पड़ाव डाल दिया । उसने अपने एक दूत को ईल्तूतमिश के पास शरण याचना के लिए भेज दिया । इसका उसने बड़े ही धैर्य से सामना कर मुगलों के विद्रोह को शान्त किया । 


चंगेज खां का आक्रमण : अप्रत्यक्ष रूप से चंगेज खा के आक्रमण ने ईल्तुतमिश की स्थिति को और भी सुदृढ़ बना दिया क्योंकि इसके फलस्वरुप उसने यल्टूज और कुबाचा का नामो - निशान मिटा दिया । पहले को मंगोलों द्वारा बन्दी बना लिया गया और दूसरे की शक्ति एकदम क्षीण हो गयी जो ईल्तुतमिश के सामने नहीं ठहर सका और अन्त में सिन्धु नदी में डूब कर मर गया । 

उसकी प्रमुख विजय : अपने प्रतिद्वन्द्वियों को परास्त करने में ईल्तुतमिश को जो सफलता मिली उसके अलावे उसकी सैनिक सफलताओं में ग्वालियर पर उसका अधिकार और मालवा पर आक्रमण गिने जा सकते है । इस तरह से उसने विन्ध्य के उत्तर में समस्त भारत पर अपना पूर्ण प्रभुत्व स्थापित कर लिया । 

भवन : ईल्तुतमिश ने अनेक भवनों का निर्माण करवाया । उसके जीवन की सबसे अधिक गौरवपूर्ण घटना बगदाद के खलीफा से सम्मान - पदक प्राप्त करना है । सन् 1236 ई ० में उसकी मृत्यु हो गयी । उसने कुतूबमीनार को पूरा करवाया और कुतूबमीनार के निकट ही कई खूबसूरत भवन बनवाये । वहीं पर एक सुन्दर मकबरे में वह दफनाया भी गया । उसने अजमेर में भी एक सुन्दर तथा विशाल मस्जिद का निर्माण करवाया था । 

चांदी का सिक्का : ईल्तुतमिश पहला बादशाह था जिसने सिक्कों पर विशुद्ध अरबी लिपि का प्रचलन कराया और चांदी के " टंक ' नामक सिक्के को अपने राज्य का स्टैण्डर्ड सिक्का घोषित किया । यही टंक वर्तमान रुपयों का पूर्वज है । इसके संबंध में शिराज नामक भला और उदार राजा था जो अपने ही प्रयत्नों इतिह्मसकार ने यह लिखा है कि- " वह से इतने बड़े साम्राज्य का स्वामी बना था । " 

मूल्यांकन ( Estimate ) : ईल्तूतमिश के संबंध में सर बुल्जले हेग का यह कहना सत्य ही है कि ' ' ईल्तुतमिश ही गुलाम सुल्तानी में सबसे उच्च पद ग्रहण करने का अधिकारी है । "  उसकी सफलताएं कभी भी उसके स्वामी के बराबर नही थी । फिर भी उसे ऐबक की भांति एक महान साम्राज्य को नतिक एव भातिक सहायता न मिल सकी । शिराज के शब्दों में ईल्तुतमिश जैसा गुणवान , दयालु , बुद्धिमान और धर्म परायण , लोगो के प्रति सम्मान रखनेवाला शासक कभी भी सिहासनारुढ़ नहीं हआ। अल्लाह के इलाकों का संरक्षक और ईश्वर के सेवकों का सहायक भी बताया है । 


(पढ़ने के लिए धन्यवाद)