Krishna Quotes In Hindi 2021 | Krishna Suvichar in Hindi

Krishna Quotes In Hindi 2021 | Krishna Suvichar in Hindi

 Krishna Quotes In Hindi

Bal Krishna Quotes In Hindi

Krishna Quotes In Hindi
"दुःख से जिसका मन परेशान नहीं होता, सुख की जिसको आकांक्षा नहीं होती, तथा जिसके मन में राग, भय और क्रोध नष्ट हो गए हैं, ऐसा मुनि आत्मज्ञानी कहलाता है।"; -श्री कृष्णा
"श्रेष्ठ मनुष्य जैसा आचरण करता है, दूसरे लोग भी वैसा ही आचरण करते हैं।, वह जो प्रमाण देता है, जनसमुदाय उसी का अनुसरण करता है।"; -श्री कृष्णा
"जब जब संसार में धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब – तब अच्छे लोगों की रक्षा, दुष्टों का संहार, और धर्म की स्थापना करने के लिए, मैं हर युग में अवतरित होता हूँ|"; -श्री कृष्णा
"जो चीज हमारे हाथ में नहीं है, उसके विषय में चिंता करके कोई फायदा नहीं।"; -श्री कृष्णा
"केवल मन ही, किसी का मित्र और शत्रु होता है।"; -श्री कृष्णा
"हम जो देखते हैं वो हम हैं, और हम जो हैं हम उसी वस्तु को निहारते हैं, इसलिए जीवन मे हमेशा अच्छी और सकारत्मक चीज़ो को देखें और सोचें।";-श्री कृष्णा
"लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे, सम्मानित व्यक्ति के लिए अपमान मृत्यु से भी बदतर है।";-श्री कृष्णा
Bal Krishna Quotes in Hindi
"जो कोई भी जिस किसी भी देवता की पूजा, विश्वास के साथ करने की इच्छा रखता है, मैं उसका विश्वास उसी देवता में दृढ कर देता हूँ।";-श्री कृष्णा
"मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है।"; -श्री कृष्णा
"आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर, अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो,अनुशाषित रहो, उठो।"; -श्री कृष्णा
"जो हमेशा मेरा स्मरण या एक-चित्त मन से मेरा पूजन करते हैं, मैं व्यक्तिगत रूप से उनके कल्याण का उत्तरदायित्व लेता हूँ।";-श्री कृष्णा
"मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है, और लगातार तुम्हें बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है।";-श्री कृष्णा
"कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।";-श्री कृष्णा
"कभी ऐसा समय नहीं था जब मैं, तुम,या ये राजा-महाराजा अस्तित्व में नहीं थे, ना ही भविष्य में कभी ऐसा होगा कि हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाये।"; -श्री कृष्णा
"तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं हैं, और फिर भी ज्ञान की बातें करते हो, बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं।"; "सभी कार्य ध्यान से करो, -श्री कृष्णा
करुणा द्वारा निर्देशित किए हुये।"; "आपके सर्वलौकिक रूप का मुझे न प्रारंभ न मध्य न अंत दिखाई दे रहा है।"; -श्री कृष्णा
Jai Shree Krishna Quotes In Hindi
"सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।"; -श्री कृष्णा
"भगवान प्रत्येक वस्तु में है और सबके ऊपर भी।"; -श्री कृष्णा
"सन्निहित आत्मा का अस्तित्व अविनाशी और अनन्त हैं, केवल भौतिक शरीर तथ्यात्मक रूप से खराब है, इसलिए हे अर्जुन! लड़ते रहो।";-श्री कृष्णा
"प्रबुद्ध व्यक्ति सिवाय ईश्वर के, किसी और पर निर्भर नहीं करता।";-श्री कृष्णा
"मैं सभी प्राणियों को सामान रूप से देखता हूँ, ना कोई मुझे कम प्रिय है ना अधिक, लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं, वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूँ।";-श्री कृष्णा
"प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना, सभी समान हैं।";-श्री कृष्णा
"किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं अच्छा है कि अपना काम करें, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े।"; -श्री कृष्णा
"सभी अच्छे काम छोड़ कर बस भगवान में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाओ, मैं तुम्हे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा, शोक मत करो।";-श्री कृष्णा
"निर्माण केवल पहले से मौजूद चीजों का प्रक्षेपण है।";-श्री कृष्णा
"स्वर्ग प्राप्त करने और वहां कई वर्षों तक वास करने के पश्चात, एक असफल योगी का पुन: एक पवित्र और समृद्ध कुटुंब में जन्म होता है।";-श्री कृष्णा
"वह जो इंसान ज्ञान में विश्वास नहीं रखते, मुझे प्राप्त किये बिना जन्म और मृत्यु के चक्र का अनुगमन करते हैं";-श्री कृष्णा
Shri Krishna ke vichar in Hindi
"बुरे कर्म करने वाले, सबसे नीच व्यक्ति जो राक्षसी प्रवित्तियों से जुड़े हुए हैं, और जिनकी बुद्धि माया ने हर ली है, वो मेरी पूजा या मुझे पाने का प्रयास नहीं करते।";-श्री कृष्णा
"मैं ऊष्मा देता हूँ, मैं वर्षा करता हूँ, मैं वर्षा रोकता भी हूँ, मैं अमरत्व भी हूँ, और मृत्यु भी मैं ही हूँ।"; -श्री कृष्णा
"जो इस लोक में अपने काम की सफलता की कामना रखते हैं, वे देवताओं का पूजन करें।";-श्री कृष्णा
"मेरे लिए ना कोई घृणित है ना प्रिय, किन्तु जो व्यक्ति भक्ति के साथ मेरी पूजा करते हैं, वो मेरे साथ हैं और मैं भी उनके साथ हूँ।";-श्री कृष्णा
"वह जो सभी इच्छाएं त्याग देता है, मैं और मेरा की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है उसे शांति प्राप्त होती है।";-श्री कृष्णा
"जब वे अपने कार्य में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते हैं।"; "यद्यपि मैं इस तंत्र का रचयिता हूँ, लेकिन सभी को यह ज्ञात होना चाहिए कि मैं कुछ नहीं करता और मैं अनंत हूँ।";-श्री कृष्णा
"जो व्यक्ति आध्यात्मिक जागरूकता के शिखर तक पहुँच चुके हैं, उनका मार्ग है निःस्वार्थ कर्म. जो भगवान् के साथ संयोजित हो चुके हैं उनका मार्ग है स्थिरता और शांति।";-श्री कृष्णा
"बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए बिना आसक्ति के काम करना चाहिए।"; -श्री कृष्णा
"इंद्रियों की दुनिया में कल्पना सुखों की शुरुआत है, और अंत भी, जो दुख को जन्म देता है।"; -श्री कृष्णा
"कर्म योग वास्तव में एक परम रहस्य है।"; "यह बड़े ही शोक की बात है, कि हम लोग बड़ा भारी पाप करने का निश्चय कर बैठते हैं, तथा राज्य और सुख के लोभ से अपने स्वजनों का नाश करने को तैयार हैं।";-श्री कृष्णा
"व्यक्ति जो चाहे बन सकता है, यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे।";-श्री कृष्णा
Krishna Suvichar in Hindi
"मैं समय हूँ, सबका नाशक, मैं आया हूँ दुनिया का उपभोग करने के लिए।"; -श्री कृष्णा
"कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया है।"; -श्री कृष्णा
"वह जो वास्तविकता में मेरे उत्कृष्ट जन्म और गतिविधियों को समझता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनः जन्म नहीं लेता और मेरे धाम को प्राप्त होता है।";-श्री कृष्णा
"मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ, मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हूँ।"; -श्री कृष्णा
"बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।"; -श्री कृष्णा
"मेरी कृपा से कोई सभी कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए भी, बस मेरी शरण में आकर अनंत अविनाशी निवास को प्राप्त करता है।"; -श्री कृष्णा
"मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते हैं और जो मुझसे प्रेम करते हैं।"; -श्री कृष्णा
"सबसे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, क्योंकि वह ना कभी था ना कभी होगा, जो वास्तविक है वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।"; -श्री कृष्णा
"इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है।"; "अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना, निष्क्रियता से बेहतर है।"; -श्री कृष्णा
"स्वार्थ से भरा कार्य इस दुनिया को क़ैद मे रख देगा, अपने जीवन में स्वार्थ को दूर रखे, बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के।"; -श्री कृष्णा
"ऐसा कुछ भी नहीं, चेतन या अचेतन, जो मेरे बिना अस्तित्व मे हो सकता हो।"; "मैं सभी प्राणियों के ह्रदय में विद्वान हूँ।"; -श्री कृष्णा
Shri Krishna ke Anmol vachan in Hindi
"खाली हाथ आये और खाली हाथ वापस चले।, जो आज तुम्हारा है, कल और किसी का था, परसों किसी और का होगा, तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो।, बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है।";-श्री कृष्णा
"सुख – दुःख, लाभ – हानि और जीत – हार की चिंता ना करके, मनुष्य को अपनी शक्ति के अनुसार कर्तव्य - कर्म करना चाहिए। ऐसे भाव से कर्म करने पर मनुष्य को पाप नहीं लगता। -श्री कृष्णा
"जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा, तुम भूत का पश्चाताप न करो।, भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है, "परिवर्तन संसार का नियम है। -श्री कृष्णा
जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है।, -श्री कृष्णा
एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। -श्री कृष्णा
मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।"; -श्री कृष्णा
"शस्त्र इस आत्मा को काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती, जल इसको गीला नहीं कर सकता, और वायु इसे सुखा नहीं सकती।-श्री कृष्णा
"जैसे मनुष्य अपने पुराने वस्त्रों को उतारकर दूसरे नए वस्त्र धारण करता है, वैसे ही जीव मृत्यु के बाद अपने पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर प्राप्त करता है।-श्री कृष्णा
"तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो।, यही सबसे उत्तम सहारा है जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त रहता है। -श्री कृष्णा
"आत्मा ना कभी जन्म लेती है और ना मरती ही है।, शरीर का नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता।-श्री कृष्णा
"आत्मा अजर अमर है। जो लोग इस आत्मा को मारने वाला या मरने वाला मानते हैं, वे दोनों ही नासमझ हैं आत्मा ना किसी को मारती है और ना ही किसी के द्वारा मारी जा सकती है। -श्री कृष्णा
"न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से मिलकर बना है और इसी में मिल जायेगा।-श्री कृष्णा
Krishna seekh in Hindi
आत्मा स्थिर है – फिर तुम क्या हो?"; "जैसे इसी जन्म में जीवात्मा बाल, युवा और वृद्ध शरीर को प्राप्त करती है। वैसे ही जीवात्मा मरने के बाद भी नया शरीर प्राप्त करती है।, इसलिए वीर पुरुष को मृत्यु से घबराना नहीं चाहिए। -श्री कृष्णा
"विषम परिस्थितियों में कायरता को प्राप्त करना, श्रेष्ठ मनुष्यों के आचरण के विपरीत है।, ना तो ये स्वर्ग प्राप्ति का साधन है, और ना ही इससे कीर्ति प्राप्त होगी।-श्री कृष्णा
"जो मनुष्य बिना आलोचना किये, श्रद्धापूर्वक मेरे उपदेश का सदा पालन करते हैं, वे कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। -श्री कृष्णा
"मनुष्य कर्म को त्यागकर कर्म के बंधन से मुक्त नहीं होता। केवल कर्म के त्याग मात्र से ही सिद्धि प्राप्त नहीं होती। कोई भी मनुष्य एक क्षण भी बिना कर्म किये नहीं रह सकता।-श्री कृष्णा
"जो मनुष्य सब कामनाओं को त्यागकर, इच्छा रहित, ममता रहित तथा अहंकार रहित होकर विचरण करता है, वही शांति प्राप्त करता है।-श्री कृष्णा
"जैसे जल में तैरती नाव को तूफान उसे अपने लक्ष्य से दूर ले जाता है, वैसे ही इन्द्रिया सुखी मनुष्य को गलत रास्ते की ओर ले जाता है।-श्री कृष्णा
"जो कुछ भी तू करता है, उसे भगवान को अर्पण करता चल। ऐसा करने से सदा जीवन-मुक्ति का आनंद अनुभव करेगा। -श्री कृष्णा
"शांति से सभी दुःखों का अंत हो जाता है, और शांतचित्त मनुष्य की बुद्धि शीघ्र ही स्थिर होकर परमात्मा से युक्त हो जाती है।-श्री कृष्णा
क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो?, किससे व्यर्थ डरते हो?, कौन तुम्हें मार सकता है?, आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है।-श्री कृष्णा
"विषयों का चिंतन करने से विषयों की आशक्ति होती है। आशक्ति से इच्छा उत्पन्न होती है और इच्छा से क्रोध होता है। क्रोध से सम्मोहन और अविवेक उत्पन्न होता है, सम्मोहन से मन भृष्ट हो जाता है। मन नष्ट होने पर बुद्धि का नाश होता है, -श्री कृष्णा
Krishna Quotes in Hindi For Love
"हर काम का फल मिलता है - इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है -श्री कृष्णा
"संयम का प्रयत्न करते हुए ज्ञानी मनुष्य के मन को भी चंचल इन्द्रियां बलपूर्वक हर लेती हैं।, जिसकी इन्द्रियां वश में होती हैं, उसकी बुद्धि स्थिर होती है। -श्री कृष्णा
"जो भी मनुष्य अपने जीवन अध्यात्मिक ज्ञान के चरणों के लिए दृढ़ संकल्पो में स्थिर हैं, वह समान्य रूप से संकटो के आक्रमण को सहन कर सकते हैं, और निश्चित रूप से खुशियाँ और मुक्ति पाने के पात्र हैं। -श्री कृष्णा
"जब तुम्हारी बुद्धि मोहरूपी दलदल को पार कर जाएगी, उस समय तुम शास्त्र से सुने गए और सुनने योग्य वस्तुओं से भी वैराग्य प्राप्त करोगे।-श्री कृष्णा
"केवल कर्म करना ही मनुष्य के वश में है, कर्मफल नहीं। इसलिए तुम कर्मफल की आशक्ति में ना फंसो तथा अपने कर्म का त्याग भी ना करो -श्री कृष्णा
"तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो?, तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आये, जो लिया यहीं से लिया।, जो दिया, यहीं पर दिया।, जो लिया, इसी (भगवान) से लिया।, जो दिया, इसी को दिया। -श्री कृष्णा
"जो कार्य में निष्क्रियता, और निष्क्रियता में कार्य देखता है, वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है।-श्री कृष्णा
"मैं ही सबकी उत्पत्ति का कारण हूँ, और मुझसे ही जगत होता है।-श्री कृष्णा
"तुम यह निश्चयपूर्वक सत्य मानो कि मेरे भक्त का कभी भी विनाश या पतन नहीं होता है।-श्री कृष्णा
"यदि कोई बड़े से बड़ा दुराचारी भी अनन्य भक्ति भाव से मुझे भजता है, तो उसे भी साधु ही मानना चाहिए और वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है, तथा परम शांति को प्राप्त होता है।"; "सभी प्राणी मेरे लिए समान हैं, -श्री कृष्णा
"तुम सदा मेरा स्मरण करो और अपना कर्तव्य करो। इस तरह मुझमें अर्पण किये मन और बुद्धि से युक्त होकर निःसंदेह तुम मुझको ही प्राप्त होगे| -श्री कृष्णा
Mahabharat Krishna Quotes in Hindi
"जैसे प्रज्वलित अग्नि लकड़ी को जला देती है, वैसे ही ज्ञानरूपी अग्नि कर्म के सारे बंधनों को भस्म कर देती है। -श्री कृष्णा
"अपने आप जो कुछ भी प्राप्त हो, उसमें संतुष्ट रहने वाला, ईर्ष्या से रहित, सफलता और असफलता में समभाव वाला कर्मयोगी कर्म करता हुआ भी कर्म के बन्धनों से नहीं बंधता है। -श्री कृष्णा
"जो भक्त जिस किसी भी मनोकामना से मेरी पूजा करते हैं, मैं उनकी मनोकामना की पूर्ति करता हूँ। -श्री कृष्णा
"काम, क्रोध और लोभ, ये जीव को नरक की ओर ले जाने वाले तीन द्वार हैं, इसलिए इन तीनों का त्याग करना चाहिए| -श्री कृष्णा
"अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है"; "इन्द्रियां शरीर से श्रेष्ठ कही जाती हैं, इन्द्रियों से परे मन है और मन से परे बुद्धि है, और आत्मा बुद्धि से भी अत्यंत श्रेष्ठ है। -श्री कृष्णा
"इन्द्रियां, मन और बुद्धि काम के निवास स्थान कहे जाते हैं। यह काम इन्द्रियां, मन और बुद्धि को अपने वश में करके ज्ञान को ढककर मनुष्य को भटका देता है। -श्री कृष्णा

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